तुम न आये ...
ज्योति जलाये सारी रैन जगे,
प्रीतम अबतक घर ना आये |
पतिंगा आये जल मर जाये ,
कबसे हैं मेरे नैन जगे ||
ज्योति जलाये ....
कोई उनके पास तो जाए ,
उनको अपने साथ ले आये |
बीती जाये सारी उमरिया ,
चलते - चलते पाँव थके ||
ज्योति जलाये .....
कब तक तू मुझको तडपाये ,
बैठे हैं हम आश लगाये |
बिखर गया अब मेरा आसरा ,
राह मैं तेरी नैन लगे ||
ज्योति जलाये ......
प्रीतम अब तुम जब आओगे ,
अँधियारा सब घर पाओगे |
सूना घर का आँगन होगा ,
बीती रात पर हम ना जगे ||
ज्योति जलाये सारी रैन जगे
Tuesday, November 23, 2010
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